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कविता

चलते चले

पत्थर की सी राहों में,
यूँ ठोकर खाते चलते चले।

मिले कई मानुष अनजाने में,
कुछ कठोर दिल तो कुछ बहुत भले।

सब यादें समेट मुट्ठी में,
सबको गले लगाते चलते चले।

कभी धूप, कभी छाँव, हर मौसम में,
हम हंसते-मुस्कुराते चलते चले।

कल्पनाओं से भरी दुनिया में,
कुछ ख़्वाब सजाते चलते चले।

कुछ कर जाने की ख्वाहिश में,
डर को डराते चलते चले।

मुक़ाम पाने की हसरत में,
पथ से पत्थर हटाते चलते चले।

इक ख़ुशी लाने की ज़िद्द में,
हर ग़म को ठुकराते चलते चले।

इक सफलता की उम्मीद में,
हर मुश्किल उठाते चलते चले।

कुछ ख़्वाब लिए एक बस्ते में,
पत्थर में राह बनाते चलते चले।

इस रास्ते भर की ज़िंदगी में,
कुछ सपनों को मरता देख चलते चले।
इस रास्ते भर की ज़िंदगी में,
कुछ सपनों को पूरा करते चलते चले।

इस रास्ते भर की ज़िंदगी में,
कभी डरकर कभी डटकर चलते चले।
इस रास्ते भर की ज़िंदगी में,
पथिक बनकर बस चलते चले।

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कविता

एक ओर सत्ताधारी , दूसरी ओर बेबसी-लाचारी

हाथ बांध ऊपर बैठा देखो सत्ताधारी,
व्याकुल हो तड़प रही है नीचे जनता सारी,
आँख बंद कर देख रहा सब वह अन्यायी अविचारी,
मज़दूरों के पाँव छिल गये, आ गयी दीनता भारी,
दावानल चरम पर है,
मिट्टी तक खाने को विवश हो गये हैं लाचारी,
कैसा है निष्ठुर,
वर्दी पहने बेबस को कुचल रहा अधिकारी।

माँ की ममता टूट चुकी है,
बच्चों का बलिदान हो चला,
पानी-पानी कहते मर रहे सब,
पर उनकी सुनता कौन भला,
गर्भवती बच्चे खो रही,
उस बच्चे का क्या जो अनाथ हो चला,
मरने लगे मानवता जहां,
क्या विपत्ति कभी टली वहाँ?

बैठ कुर्सी पर वह,
अपने नीचता का प्रमाण दे रहा।
जो थक-हार अंत में अपने गाँव को पैदल चल दिए,
बेशर्मी की हद तो देखो, उसको आत्मनिर्भर का नाम दे रहा।

समर का एलान समझ इसे, ऐ दुष्ट और उसके अनुयायी,
यह प्रतिशोध की ज्वाला भड़की है,
जब अगणित हृदय ने दी है दुहाई।

याद रख तूने दुर्बल दरिद्र को सताया है,
अभी तुझे ज्ञान नहीं तूने स्वयं संकट को बुलाया है,
आज तप रहा समस्त संसार है,
तूने स्वयं समर का यह अग्नि जलाया है।

बुझा सको तो बुझा दो आग,
छोड़ द्वेष, ईर्ष्या और मोह, दो घूँट पीयूष का पिला दो आज।
है समय, बचा सको तो बचा लो अपनी और अपने देश की लाज।
पहचानो निज कर्म तुम,
छोड़ो राज भोग का लोभ, छोड़ो धर्म का राग।

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है तमन्ना यही

है तमन्ना यही,
तुम देखो मुझे हर ख़्वाब में।
है तमन्ना यही,
तुम्हें लिखूँ अपनी ज़िंदगी की किताब में।

है तमन्ना यही,
तुम चलो मेरे साथ मेरी साँसों की तरह।
है तमन्ना यही,
तुम बहो मेरे साथ,
मेरी लहू की तरह।

है तमन्ना यही,
तुम मेरी हर शायरी का अल्फ़ाज़ बनो।
है तमन्ना यही,
जिसे मैं पढ़ती रहूँ, तुम वो किताब बनो।

है तमन्ना यही,
जिसका नशा कभी ना उतरे,
बन वो शराब तू।
है तमन्ना यही,
बन मेरी ज़िंदगी का आफ़ताब तू।

है तमन्ना यही,
चाय की तरह हो इश्क़ तुमसे बेशुमार।
है तमन्ना यही,
तुम बनो मेरे होंठों पर लगे रहने वाला सिगार।

है तमन्ना यही,
तुम लिखो अपने होंठों से मेरे जिस्म पर मुहब्बत।
है तमन्ना यही,
मुझमें खो जाने की हो तुम्हारी हसरत।

है तमन्ना यही,
ताउम्र मेरा दिल रहे तेरे लिए बीमार।
है तमन्ना यही,
हो ज़िक्र हमारी मोहब्बत का, लोगों के शेर में बार-बार।

है तमन्ना यही,बस तमन्ना यही।

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गर्भस्थ गज : हत्या या देहांत

तरस आती है उस मीडिया पर,
जो बस टी. आर. पी. पर मरता है,
गलत खबर फैलने को,
जाने कौन घूस भरता है।

बदनाम किया केरल को,
और मानवता भी बदनाम हुई,
भावनाओं से खेल, छापी उसने ऐसी खबर,
जो रातों- रात सरे-आम हुई।

क्या बिगाड़ा था उस मानुष ने,
जो बेवजह उसे फसाया,
घटी जो घटना चार दिन पहले,
क्यों मीडिया को देर याद आया।

जगह का नाम तो गलत था ही,
उसने बात भी हेर-फेर कर बताया,
जाने इस घटना को सुर्ख़ियों में ला,
उसने कौन सा और खबर दबाया।

रखा फल खेतों में लोगों ने,
जंगली सूअर से खेत बचाने को,
नहीं खिलाया किसी ने फल,
उस गर्भस्थ गज को तड़पाने को।

भावुक हो रहे भले मानुष,
कभी पशु-फार्म भी होकर आओ,
उनका दर्द भी महसूस करो,
उनपर भी कुछ कविता सुनाओ।

क्यों नहीं बताती मीडिया,
जब जानवर ज़िंदा जलाये जाते हैं,
जब ज़िंदा जानवर के ही,
बेदर्दी से चमड़ी हटाए जाते हैं।

क्यों नहीं बताती मीडिया,
एक बेगुनाह गर्भवती तड़प रही है जेल में,
क्यों छुपा रही है मीडिया,
उन मज़दूरों की कहानी, जो तड़प रहा है रेल में।

तुम भी लिखो न कविता उस हर अंडे के लिए,
जिसमें एक चूज़ा पलता है,
लिखो न उस जानवर के लिए भी,
जो हर रोज़ किसी के घर, में पकता है।

मानवता को बस हाथी से मत तोलो,
जब भेद करते हो जाती और धर्म में,
तब भी ज़रा मानवता की बात बोलो,
जब करते हो अत्याचार दलित और नारी पर,
कभी तब भी मानवता का पिटारा खोलो।

मत दिखाओ गलत खबरें,
लोग तुम पर विश्वास करते है,
कुछ तो मानवता दिखाओ, सही खबर बताओ,
लोग तुम्हारी ही दिखायी गयी राह पर चलते हैं।

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तुमने मेरे लिए क्या किया ?

हमने तुम्हारे लिए क्या नहीं किया,
वक़्त का खेल समझूँ या किश्मत का,
अब भी पूछते हो हमने तुम्हारे लिए क्या किया।

अब व्यर्थ की व्याख्या का क्या फायदा,
पहले की ही तरह सह लिया करेंगे थोड़ा और ज्यादा।

आज मालूम हुआ,
उस दिन रोता देख भी तुम क्यूँ न आये,
मेरे गहरे जख्म पर भी क्यूँ नहीं मरहम लगाए।

तुम्हें मुहब्बत नहीं या हमारा इश्क़ कम है,
जाने ज़िन्दगी में क्यूं इतने गम है,
लाख कोशिशें की, आँखे फिर भी नम है।

शायद मेरी ख़ामोशी ही मेरे जख्मों का मरहम है।

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वाह मोदी जी वाह

आग लगी है बस्ती में,
मोदी जी हैं मस्ती में।

भारत आ गया है सड़क पर,
उन्हें उससे क्या फर्क पर।

हमारी ही रोटी खाते हैं,
और हमें ही रौब दिखाते।

करोड़ो की प्रतिमाएं बनवाते हैं, दीप जलवाते हैं,
धर्म के नाम पर देश चलाते हैं।

और अंधभक्तों के क्या कहने,
ऐसे लपेटे में आते हैं,
कुत्तों की तरह वफादारी निभाते हैं,
बंद आँखों से जुमले देख,
उसी को गद्दी पर बिठाते हैं,
वापिस वही सरकार बनाते हैं।

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CO RO NA / COVID-19

2019 में आया एक वायरस हरजाई,
उसके झांसे में आकर कितनो ने जान गवाँई,
डॉक्टरों ने किया हौसला अफजाई,
अंत में उन्होंने भी मुँह की खाई।

कोरोना नाम की ये विपदा आयी,
दुनिया भर में तबाही मचाई,
सबने की बहुत सफाई,
हाथों की जमकर की धुलाई।

सबने मास्क भी लगाया,
अपनों से दूरी तक बनाया,
ये अकड़ू कोरोना तब भी बाज़ न आया,
घुसकर जिंदा मानुस में अपनी जनसँख्या बढ़ाया।

बन्द पड़ा हर टाउन,
देश भर में लॉक डाउन,
परन्तु दिनों दिन बढ़ रहा हेड काउंट।

डॉक्टर्स हो रहे नाकाम,
चीन हो रहा बदनाम,
WHO कर रहा अवेयर करने का काम,
संसार चिन्तामयी, न जाने क्या होगा अंजाम।

लोग घर में बंद बौखला रहे,
कुछ टिक-टॉक बना रहे,
तो कुछ इंस्टा चैलेंज चला रहे,
कोई कहता नेटफ्लिक्स एंड चिल,
कहीं गो कोरोना गो चिल्ला रहे,
बात यहीं खत्म न हुई,
कुछ लोग तो कोरोना को भगवान बता रहे,
उसकी मूर्ति तक बना रहे,
और खीर पूरी भी चढ़ा रहे,
इतने से मन न भरा तो कुछ लोग फेक न्यूज़ फैला रहे।

एक तरफ दुनिया के डॉक्टर्स मेहनत से वैक्सीन बना रहे,
सरकार उनकी वाहवाही में थाली बजवा रही,
लोग घरों से ऊबकर सड़कों पर आ रहे,
पुलिस मजबूरन उनपर लाठी चला रही,
और दूसरी तरफ ये कोरोना,
तमाशा देख खूब खिलखिला रही।

हर कोई यहाँ असहाय है,
सब बहुत घबराये हैं,
थोड़ा सहो, घर में ही रहो,
हाथों की सफाई, लोगो से दूरी,
अब बस यही मात्र बचे रहने के उपाय हैं,
वरना बेटा, मौत सबके सर पर मंडराए है।

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वो चाँद सा शीतल, मैं सूरज का ताप हूँ

वो चाँद सा शीतल,
मैं सूरज का ताप हूँ।
वो शर्द की धूप,
मैं सुलग़ती हुई आग हूँ।

वो नीरस सा मनुष्य,
मैं उसके तबस्सुम का राज़ हूँ।
वो मेरे ख्वाबों का शहंशाह,
मैं ही उसका ताज हूँ।

वो पवित्र है जल सा,
मैं पानी सा दिखने वाला तेज़ाब हूँ।
वो स्थिर सा जल है,
मैं कोई बहता सैलाब हूँ।

वो मधुर सी तान,
मैं कोई कड़वी अल्फ़ाज़ हूँ।
वो सुलझा हुआ इंसान,
मैं उलझी कोई अनजान हूँ।

वो मेरे नज़्मों की वजह,
मैं उसकी ज़िंदगी का राज़ हूँ।
वो मेरे होठों की हंसी,
मैं उसके गम का साथ हूँ।

वो मेरी ज़िन्दगी का सवेरा,
मैं उसकी हसीन रात हूँ।
वो मेरी रातों की नींद,
मैं उसके दिन की शुरुआत हूँ।

वो मेरी पहली मुहब्बत,
मैं उसकी आख़िरी साँस हूँ।।

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उससे ही सब मनसूब

कौम न पूछी, रूप न देखा, बस देखा उसका नूर,
कर बैठी उसके रूह से मुहब्बत, उससे ही सब मनसूब,
तमन्ना उसकी भी थी, चर्चे भी थे खूब,
इश्क़ का मंजर था, शर्तें भी थी उसे मंजूर।
मत पूछो फिर क्या हुआ,
जब ये जोड़ा जुदा हुआ,
ज़िन्दगी में ऐसा अँधेरा हुआ,
तकिये के सिवा न कोई मेरा हुआ।
वीरानी हो गयी थी ज़िंदगी, न जेहन में थी कोई प्यास,
तन्हा बैठी सोचती रहती, बचा क्या अब खास
न मैं खुद की रही, न कोई और था मेरे पास,
खुमारी ऐसी की किसी और की भी न थी तालाश।

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छोटी सी ज़िंदगी में, सारे जहान से प्यार करूँ

कभी ज़िन्दगी का ख्याल तो कभी शौक का सवाल है,
मन एकदम विचलित और दिमाग का भी बुरा हाल है,
क्षण भर भी मुश्किल से कटे, जेहन में चल रही, बस एक ही सवाल है,
है मुझे जुनून, फिर वक़्त को क्यू मलाल है।

हर वासना छोर, हर कौशल को पाऊँ मैं,
ज्ञान अर्जित करने को हर हद पार कर जाऊँ मैं,
चंचल मन और अतृप्त हृदय को बस यही समझाऊँ मैं
क्षणिक ख़ुशी की खातिर क्या ज़िंदगी गवाऊँ मैं।

गुजर गया जो वक़्त, उसे कैसे मैं उधर लूँ ,
यही मौका है अब वर्तमान को सुधार लूँ ,
बची हुई जो ज़िंदगी है, उसे अब सवाँर लूँ।

अपने कौशल से मैं समाज का उद्धार करूँ,
समाज को प्रदान कर, खुद पर एक उपकार करूँ,
इस छोटी सी ज़िंदगी में मैं सारी जहान से प्यार करूँ।

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वो अजीज मेरे किस काम का है?

तुम्हें बताती हूँ अपनी तकलीफें खुदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
खुद से खुद को बहलाती हूँ सदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
गैरों के साथ बिताती हूँ वक़्त तो बता,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
झूठी तस्सल्ली दे करती हूँ दिल को रजा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
अगर गम ही है अंजाम-ए-वफ़ा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
उसके होने से भी जो ज़िन्दगी ग़मज़दा,
फिर वो अजीज किस काम का है?
मैं दर्द की मारी, हो गयी बेचारी, बता न खुदा,
फिर वो अजीज मेरे किस काम का है?
पहना कर उल्फ़त का ताज़, कर दे बर्बाद,
फिर वो अजीज तो बस एक नाम का है।

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ऐसे होते हैं पिता

आज फिर से मेरे पिता के साथ वाला बचपन याद आया है,
बेटी हूँ कभी उन्होंने ये महसूस नहीं होने दिया।
हमेशा बेटे की तरह दुनिया दिखाया,
सबसे लड़कर पढ़ाया-लिखाया,
अपने पैरों पर चलना सिखाया।
जब भी रूठी मैं, उन्होंने प्यार से मनाया,
बाहर से बेशक सख्त पर भीतर से हमेशा उन्हें नर्म ही पाया,
कुदरत की मेहरबानी उन्होंने ऐसा पिता बनाया।

कभी परीक्षा की तयारी करवाते,
कभी दुनियादारी और घर की जिम्मेदारी समझाते हैं।
हर कदम फूँक-फूँक कर चलना सिखाते,
कभी कहानियों से बताते तो कभी उदहारण दिखाते हैं।
ज़िन्दगी में आने वाली हर परेशानियां बताते,
जाने कहाँ से हर परेशानियों का हल ढूंढ कर लाते हैं।
मेरी हर असफलता पर मेरा हौसला बढ़ाते,
किश्मत वालों को ही ऐसे पिता मिल पाते हैं।

जब घर में माँ नहीं तब वो माँ का रूप हैं,
अनुशासन उनसे बना, वो ही छाँव और धूप हैं।
कभी कांधे पे बिठाया, कभी साईकल से घुमाया,
जो फटकार कर समझाए, कभी-कभी चॉकलेट भी खिलाए,
ये पिता एक अद्भुत स्वरुप है।

कभी बेटी समझकर शासन चलाते हैं,
कभी हमउम्र की तरह सबकुछ बताते हैं।
ये पिता ही हैं जो हमारी ख़ामोशी भी समझ जाते हैं,
सबकुछ जान कर भी कभी-कभी अनजान बन जाते हैं।
होठों पे हँसी होती है और सीने में दर्द छुपाते हैं,
कभी हमारी जिद्द, कभी माँ की परेशानी,
कभी समाज के ताने, कभी हमारे झूठे बहाने,
इन्हीं के बीच अपनी ज़िंदगी बिताते हैं।
ऐसे होते हैं हमारे कठोर पिता जो अपने अंदर की भावनाओं को छुपाते हैं।
इसलिए मेरे पिता भगवान से भी पहले आते हैं।

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Feeling

You never want to cry
You know you first gave a better try…
But nobody gonna feel it
Only you yourself can heel it…
When you get stressed up
Everything gets messed up…
Everyone is there to give you a shit
Nobody exists for you who can perfectly fit…
Sometimes you feel that much alone
You pick up your phone
Your heart says go on go on
You type, delete, sigh & cry
And even in rain, everything seems dry…
You left with the only choice
Just give a sigh and try high,
You left with the only feeling
Nobody is there to give a high five,
You alone have to go for a long drive…

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लड़की या इंसान

माना Pink बहुत सुंदर है पर रॉयल ब्लू हमें भी पसंद है,
हाँ, rights तो बहुत दे दी है तुमने, पर जाकर देखो लाखों पंछी अभी भी पिंजरे में बंद हैं।
हो सकता है तुम्हें feminism गलत लगता हो,
लड़कियों को 33% reservation, ये बहुत चुभता हो।
अरे हम नहीं कहते reservation दो,
पर compitition की जगह education दो।
Please कोई इन्हें समता और समानता में फर्क समझाओ,
All are Equal, बोलकर कम से कम मज़ाक तो मत बनाओ।

लोगों को कहते सुना है, गावों में डर है, city तो safe है,
If I’m not wrong, निर्भया और जेसिका दिल्ली का ही तो case है।
छोटे कपड़ों में hot और सूट में आंटी,
Rights का क्या करें, बजाएं घंटी ?
लड़कों ने छेड़ा, ohh पुलिस को बुलाओ,
और पुलिस कहती है, case solve करना है ?
पहले लड़की को मेरी बिस्तर पे सुलाओ।
अब बताइये, ऐसी हालत में घंटा कोई लड़की बोलेगी,
प्लीज मुझे बचाओ ?

हाँ, ये सच है की लड़कियाँ भी boyfriend बनाती है,
उनके पैसे उड़ाती है और बिस्तर पर भी सुलाती हैं।
But let me correct, इसलिए नहीं की वो अपनी मर्यादा और संस्कार भूल जाती है।
और अगर भूल भी जाती है तो इसमें गलत क्या है,
लड़का करे तो कोई बात नहीं, लड़की करे तो फर्क क्या है ?
फिर भी अगर आप इसे गलत मानते हैं तो, मैं आपको बताती हूँ,
इसका कारण थोड़ा विस्तार में समझाती हूँ।
तो सुनिए,
घर से उतने पैसे नहीं मिलते जितना एक लड़के को दिए जाते हैं,
लड़के भी तो afterall घर के ही पैसे उड़ाते है।
Ohh! actually लड़की के घर वाले तो दहेज़ के लिए बचाते हैं,
BTW एक ही घर में ये भेद-भाव किये जाते हैं।
माना कुछ लड़के कमा कर भी उड़ाते है, पर don’t forget लड़कियों को हम कामाना कहाँ सिखाते हैं,
उन्हें तो हम बचपन से घर की responsiblities समझाते हैं, दूसरे घर भेजने की तयारी में लग जाते है।

Fuck the sentence, भगवान ने लड़के-लड़कियों को अलग बनाया है,
Please मुझे मिलवाओ जिस भगवान ने तुम्हें ये बताया है।
क्या है ये धर्म, जाती, और लिंग,
Ohh man! I hate these sling.
मुझे बहुत अफ़सोस है की आपकी सोच इतनी घटिया है,
आपको बता दूँ की ये लड़का-लड़की बस नया इंसान पैदा करने का एक ज़रिया है।
बहुत कह दिया, बस इतना कहना है,
हम भी इंसान हैं, बस इंसान की तरह रहना है।
Equality के पहले equity लाओ, ये भी एक सिफ़ारिस है,
उनकी जगह खुद को रखकर सोचो, हवस नहीं प्यार से देखो,
तुम लड़को से भी ये गुज़ारिस है।

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सिकंदर कौन

कभी गम का सैलाब, तो कभी कुचलता ख़्वाब देखा है,
देखा है लोगों की आँखों में दर्द,
दर्द-ए-दिल, होठों पे हंसी वाला अंदाज भी देखा है।

गुजर जाती है ज़िन्दगी किसी की एक ख़्वाब में,
कहीं एक लम्हा भी नहीं कटता किसी की याद में,
सबके दिल में एक तन्हाई पलती है,
कोई हँसता हुआ चला जाता है,
कोई अक्खा ज़िंदगी रोता है इस तन्हाई के आड़ में।

इस छोटी सी ज़िंदगी में मैंने बहुत कुछ देखा है,
किसी को अपनी ख़ुशी से परेशान,
तो किसी को ग़म में भी मुस्कुराते देखा है।
कभी लोगों को जज़्बातों में बहता हुआ,
तो कुछ लोगों को अपने जज़्बात छुपाते देखा है।
देखा है हर किसी की आँखों में सपना,
किसी में उसे मुकम्मल करने की चाहत,
तो किसी को ज़िंदगी से हार जाते देखा है।

टूटी मैं भी बार-बार हूँ, पर हर बार खुद को टूटने से रोका है,
क्योंकि मैंने ज़िंदगी को बहुत क़रीब से देखा है,
हाँ, मैंने इस ज़िंदगी से हर पल बहुत कुछ सीखा है।
टूटा हुआ शख़्स अक़सर हार जाता है,
जो हँसता हुआ जीता है, वो सिकंदर कहलाता है।

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मेरा एक ही संसार है

मेरा एक ही संसार है,
उससे प्रेम बेसुमार है।
बस एक उस पुष्प से,
मेरी ज़िंदगी गुलज़ार है।
मेरा एक ही संसार है,
उससे प्रेम बेसुमार है।

इस प्रेमी प्रेमिका का है ऐसा अटूट बन्धन,
जैसे हो किसी सुहागन के हाथ का कंगन ।
उसकी एक खुशी के लिए, मेरी सारी खुशियाँ कुर्बान है।
मेरा एक ही संसार है,
उससे प्रेम बेसुमार है।

उसके काया, रूह और रोम-रोम में सिर्फ बसा है प्रीत,
हर ख्वाब समर्पित कर बस उसको जाऊँ मैं जीत।
वो कृष्ण का अवतार है,
किसी राधा का प्यार है।
मेरा एक ही संसार है,
उससे प्रेम बेसुमार है।

उसकी नैनो से दुनिया देखूँ, उससे ही तो जन्नत है।
निष्ठा और निवेदन से, जो मांगी ये वो मन्नत है।
उसमें जीने की खातिर, मुझे हर यातना स्वीकार है।
मेरा एक ही संसार है,
उससे प्रेम बेसुमार है।।

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जिन्दगी और लाचार लोग


क्या है ज़िन्दगी, कैसी है जिंदगी; समझना थोड़ा मुश्किल है,
कितने ही अड़चनो के बाद भी कहती है; हारो मत, तुम्हें जीना है;
सकारात्मकता इस कदर तब्दील है।

क्या कुछ नहीं सिखाती है, जीने का मक़सद बताती है,
निर्लज्ज मनुष्यों के लाख कोसने के बाद भी समझाती है,
मूर्ख इन्सान; यह वक़्त समस्याओं से भागने का नहीं है, जबरन उसे सुलझाने का है,
मौका है तुम्हारे पास, वक़्त है तुम्हारे पास कह कर बार-बार हौसला बढ़ाती है।

बार-बार याद दिलाती है तुम्हें धरती पर बोझ नहीं बनना है,
जीने के बहुत मकसद है, उन्हें पूरा करना है है।
जरुरामन्दों की मदद करना है, लोगों के दर्द समझना है,
उनकी समस्याओं को सुलझाना है, उनके लिए प्रेरणा बनना है।

परन्तु यह सब मनुष्यों को कहाँ समझ आता है
उन्हें समस्याओं से भागना और ज़िन्दगी को कोसना ज्यादा भाता है,
सुबह मजदूरी करता है, शाम को रंडी-रोना, रात में सो जाता है,
उन्हें ज़िन्दगी का बस यही मतलब समझ आता है।

यही लोग बस भगवान से अच्छी ज़िन्दगी की प्रार्थना करते हैं,
समस्याओं से भागते हैं और बड़ी बड़ी वासना करते हैं,
उन्हें पता नहीं कि वे इस पावन धरती पर भी नरक सी ज़िंदगी जीते हैं,
उन्हें कहाँ परवाह वर्तमान की,
वे सारी ज़िन्दगी केवल मरने के बाद स्वर्ग की कामना करते हैं।
मेरे विचार से पढ़े लिखे अनपढ़ इन्हें ही कहते हैं।

दुनिया बदल जाये पर ये नहीं बदलते हैं,
हजार बार गिरने के बाद भी नहीं सम्भलते हैं,
दिखावे की पूजा अर्चना करते हैं,
अन्तर्मन में केवल ईर्ष्या और द्वेष रखते हैं,
समझ नहीं आता ये खुद को बेबकूफ बनाते हैं या ज़िन्दगी को बेबकूफ समझते हैं।

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वियोग से क्षुब्ध नैन

मेरे दो अनूप नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

सयोंग धीरज हर वार,
करती है तुम्हारा इंतजार।
प्रीत में पर गए मेरे नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

अधर पर अब बस एक ही बात,
लौट आओ अब मेरे पास।
रुदन करते मेरे नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

प्यासी काया निर्मित माया,
इनपर किसने बस पाया।
मेरे दो चंचल नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

पकड़े कामना की डोरी,
रजनी में रोती चोरी-चोरी।
वियोग से क्षुब्ध मेरे नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

काटे नहीं कटते एक भी रैन,
पीड़ा में हैं मेरे नैन।
वियोग से क्षुब्ध मेरे नैन,
वेदना से हो रहे बेचैन।

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घूँघट की ओट से

इश्क़ करूँगी घूँघट की ओट से,
चाहे पीड़ित रहूँ दिल पे लगे चोट से,
तुम क्या ख़ाक समझ पाओगे मुझे,
दर्द है मेरे दिल मे, खुशी है बस होठ पे।

अपने जज़्बात मैं सबसे छुपाउंगी,
मन ही मन बस तुमको ही चाहूँगी
राधा ना सही,
मीरा बन जाऊँगी।

होगी तुम्हारे लिए बहुत राधा जैसी,
नहीं मिलेगी मेरे जैसी कोई प्रेयसी,
मैं रहूँ या ना रहूँ,
रहे तेरे होठो पर हमेशा हंसी,
विनती में ईश्वर से बस इतना मांगू,
मिले तुम्हें जहां की सारी खुशी।

जब टूटेंगे वदन और आँखे होंगी नम,
आएगी मेरी याद तुम्हें हर क्षण,
बनानी पड़ेगी जब स्वयं दो रोटी,
पुनः माँगोगे मुझे अगले जनम।

अभी तुम मेरी अहमियत से अनजान हो,
तबियत से थोड़े नादान हो,
आओगे एक दिन जरूर लौटकर,
पर शायद वो मेरी आखिरी शाम हो।।

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क़ाश मेरे पास भी कोई होता..

क़ाश मेरे पास भी कोई होता
मेरे साथ मेरा एहसास भी कोई होता
ये मेरे दर्द भी थोड़े कम होते
ऐसे अपनो के दिए ज़ख्म न होते
वो भी मेरी क़दर करता मैं भी उसका ख़्याल रखती
वो मेरी ख़ातिर जीता और मैं उसपर मरती
ज़िन्दगी में इतने गम न होते, मेरी आंखें कभी नम न होती
मैं भी उसकी साँस होती, साये की तरह साथ होती
उसका दिल मेरे पास होता, मैं उसकी धड़कन होती
होते हमारे ख़्वाब भी सुनहरे
प्यार होते समुन्दर से भी गहरे
कोई तूफ़ान भी हमे अलग न कर पाता
बेवफ़ाई भी इस क़दर डर जाता
चाह कर भी कोई हमे दूर न कर पाता
क़ाश मेरे पास भी कोई होता
मेरे साथ मेरा एहसास भी कोई होता।।

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कविता

तलब

एक तलब सी थी तुम्हें पाने की,
तुम्हारे लब्जों को छू जाने की,
तुम्हारे साँसोंमें बस जाने की,
तुम्हारे वक़्त को चुराने की।
पर ये सब तो बस मेरी चाहत थी मेरी तलब थी,
दरअसल, हकीक़त तो कुछ अलग थी।
अचानक मेरी ज़िन्दगी ने रुख़ बदला,
मेरे तुम्हारे बीच बहुत कुछ बदला।
जाने क्यों औऱ कहाँ से एक झोंका आया,
औऱ मुझे ये समझ आया,
की अब तलब नहीं मुझे तुम्हें पाने की,
शायद तलब थी तुम्हें छोड़ जाने की,
कहीं दूर तलक चले जाने की।
लेकिन मेरे इस ख़्याल से मैं खुश नहीं थी,
ये ख़्याल मुझे अंदर ही अंदर चुभ रहे थे,
आँखों में आँसू नहीं थे, पर ज़िन्दगी ग़मज़दा सी थी।
मेरे ख़्याल कुछ और कह रहे थे, मेरे एहसास कुछ और कह रहे थे।
मेरे जज़्बात मुझे बेचैन कर रहे थे।
मैं उलझी बेचैन तुम्हारे सामने पड़ी थी,
पर तुम्हें मेरी कोई क़दर नहीं थी।
मैं तुम्हारे पास होकर भी तुम्हारी नहीं थी,
ये बात मेरे ज़हन में बहुत चुभ रही थी।
मेरे अंदर बहुत से ख़्याल चल रहे थे,
आख़िर वो झोंका क्या था,
जो तुम्हें मुझसे दूर ले चला था।
मैं तुम्हें सब बताना चाहती थी,
पर शायद मैं इस काबिल नहीं थी,
आख़िर इसलिए मैं इन जज़्बातों को पन्नों में क़ैद कर रही थी।
या ख़ुदा मैं तेरे रहम को तरस रही थी।।

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कविता

क्यूँ जाते हैं हम मैखाने

यूँ हीं कोई नहीं पीता है शराब

अगर ज़िन्दगी का स्वाद हो शराब से ख़राब
ऐसे मनहूस वक़्त में शराब होता है जान

जब ज़िन्दगी में हो तड़प बेहिसाब
ये सराब होता है तन्हाई का साथ

हो जाए ज़िन्दगी जब इस क़दर बरबाद
ख़ुदा क़सम ये शराब होता है इकलौता प्यार

जब घुटता है दम ज़ीने में
तब असली मज़ा है शराब पीने में

जब पाते हैं ख़ुद को तन्हा बार-बार
ये शराब लाता है ज़िन्दगी में बहार

कब तक कोई ग़म में जियेगा
आख़िर में वो शराब ही पियेगा

बहुत सुने हमने उल्फ़त के अफ़साने
बहुत सुने हमने तन्हाई के गाने
चलते हैं अब सराबखाने
ज़िन्दगी के ग़म भुलाने
इस तन्हापन को मिटाने
दुनियां को ये समझाने
क्यूं जाते हैं हम हर रोज़ मैख़ाने।।

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तन्हापन

जो नीर बहे थे तन्हापन में
एक ज्वाला थी मेरे तन मन में
बेबाक मोहब्बत सरे आम किया था
फिर क्यूँ तुमने हमें नीलाम किया था
जो कभी अज़नबी थे वो भी तुम्हारे क़रीब हो गए
भला हम क्यों इतने बदनसीब हो गए
प्यार की भी अब इंतेहा हो गयी
दूरियाँ कुछ यूँ हमारे दरमियाँ हो गयी
की हर रोज़ तुम्हारे नाम इक पैग़ाम लिखते थे
सोच कर ये की तुम खफ़ा न हो जाओ, उसे बंद पन्नों में ही मसरूफ़ रखते थे
ऐसी नौबत आ गयी कि तुम अब छुपकर मुस्कुराने लगे
हर छोटी चीज़ भी हमसे छुपाने लगे
बेवफ़ा तो हम हरगिज़ न थे, फिर भी तुम हमसे इतनी दूरियाँ बनाने लगे।।

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ज्ज्बातें….

मेरे एहसास में तुम हो,
मेरे हर सांस में तुम हो,
मेरे दिल की जज्बात में तुम हो,
मेरे जुबां से निकली हर बात में तुम हो।

मुझे था जिसका इंतजार वो मेरे पास आया,
मुझे मिल गया तेरा साया,
जब तू मेरे पास आई,
मेरे दिल से ये आवाज आई,
यही है तेरी परछाई,
जिसके लिए बैठी थी तू अब तक आस लगाई।

अब तक था यह सब सपना,
पर अब यह सपना हो गया अपना।
जब मैने उसे अपने दिल की बात सुनाई,
तब उसकी तरफ से हाँ की आवाज आई।
अब आखिरी ख्वाहिश है तुमसे यही,
न करना मुझसे कभी बेवफ़ाई,
क्योंकि यही डर मुझे हमेशा सताई।

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Ohh, My love…

Hey, I just fed up from here,
I wanna only your care,
It’s now I’m missing you very badly,
Feeling very lonely lonely,
Wanna hug you very tightly,
All the time you hunted in my mind,
Happy moments are hard to find.
Thoughts of you making me crazy,
Why the time being so lazy.

Those nights and kisses,
Now became my wishes….
Distance of us hurts me panicly
This princess waiting for you eagerly…
Ohh, my Prince….
I love you catastrophically….

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इश्क़

इस क़दर हम तुम्हारे ग़ुलाम हो गए,
हमारे चर्चे भी सरे आम हो गए।
पलकों के साये में तुम्हें ऐसे छुपाया,
एक झलक के लिए क़त्ल-ए-आम हो गए।
हुआ हमपे इश्क़ का ऐसा असर,
न अपनी क़दर, न किसी की ख़बर।
ख़्वाबों में तुम, निग़ाहों में तुम,
सिर्फ़ तुम दिखो, मुझे हर पहर।
सुन के जानेमन मुझे चैन आ गया,
हुस्न की तलब भी अब तमाम हो गयी।
वो ख़ूबसूरत शमां, वो हसीन आलम,
जो मिले तुम, तो जस्न-ए-शाम हो गयी।

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कविता

दर्द-ए-दिल

हर सितम भूलकर तुम्हारे उल्फ़त के ख़्वाब सजाती थी।
हंसती थी मुस्कुराती थी, दरअसल दिल के जख़्म छुपाती थी।
छुप-छुप कर रोती थी, और तुम्हें हंस कर दिखाती थी।
मोहब्बत का परवान तो देखो, इतने सितम के बाद भी मुस्तफ़ा कह कर बुलाती थी।
उल्फ़त ने मुझे ऐसे मोड़ पे ला खड़ा किया था।
ऐसा लग रहा था मैंने ख़ुद से ही ख़ुद को अगुवा किआ था।
खुशियों के मंज़र लगने से पहले ही क़यामत ने मुझे इत्तला किआ था।
जिस हमराही के साथ मैंने ज़न्नत की राह तक़ी थी, उसने ही मुझे ग़ुमराह किआ था।

_श्रुति सोना

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मेरी किस्मत…

जिसके साथ होने से मैं सो नहीं पाती,
उसके साथ होने से तुम्हें सूकून की नींद आती।

जिसके जाने से मुझे चैन आता,
उसके जाने से तुम बेचैन हो जाती।

तुम्हारे दो लब्ज के लिए हम तड़प जाते,
और उसके दो लब्ज से तुम्हें जान आती।

किस्मत भी अजीब है,
मुझे ऐसे लोगों से मिलाती,
जिसके सांस से मेरी जान आती,
जिसके लब्ज से मेरी जुबान आती,
जिसके जिस्म से मेरी पहचान आती….
पर काश की ऐ-खुदा ..
ये बात वो समझ पाती,
क्यों इन बातों से वो अनजान रह जाती…
क्यों नहीं वो मेरे जज्बात समझ पाती।

काश की वो मेरी हो जाती…
काश की वो मेरी हो जाती!!

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Gift of God…

Mother is gift of God,
So, we have to treat her as lord.
She is our first teacher,
So, we have to always respect her.
She is always worried for us,
So, we have to be always conscious.
She is our power,
So, we have to keep her in mind every hour.
She always understand our feeling,
So, we have to care of her dreaming.
I promise I’ll make her pleasing,
Because she is my everything…

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यादें……

उन बीती यादों की कसक बार बार आती है,
 वो मीठी यादें हमें बहुत तडपाती है ,

काश कोई चुरा लाता उन लम्हों को 

और भर जाता दिल की जख्मो को 

इस जख्म के दर्द हमसे सहे नही जाते 

लहू बन के आंसू बहे चले जाते 

कोई नही जो इन जख्मो पर मरहम लगाते

सब इन जख्मो पर और नमक ही छिरक जाते ..
काश की वो लम्हे फिर से लौट आते ….

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बनकर चाँद तुम आ जाना

एक अरसो बाद ज़हन में मेरे, 
उमर परा है प्यार बहुतेरे,
मेरे मन की प्यास बुझा जाना,
मेरी हर तलब मिटा जाना,
कुछ मीठी याद बना जाना, 
मुझे जन्नत भी दिखला जाना,
है चाहत प्यार जताने की,
ताउम्र ज़िंदगी बिताने की,
तुम्हारे गुलसन को महकाने की,
अल्हर बन तुममें समाने की,
मेरे हर अरमान सज़ा जाना,
रहनुमा बन राह दिखा जाना,
मेरी हर उलझन सुलझा जाना,
बन कर राजकुमार तुम आ जाना,
मेरा प्रेम, साँस, एहसास, हो तुम,
चाँदनी का रात हो तुम,
तुम्हें भूलूँ भी तो कैसे,
मेरी जात, बात, जज़्बात हो तुम,
वो यादें लौटा जाना,
फिर हसीन रात बना जाना,
फिर से प्यार बरसा जाना,
सारी कसर मिटा जाना,
बनकर चाँद तुम आ जाना – २ ।

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मेरे हमसफ़र मेरे हमकदम …..

मेरे हमसफ़र मेरे हमकदम ,
तुम्ही मेरी जिंदगी हो सनम …किस्मत की लकीरों में ,
आँखों से बहती नीरो में ,
बस गये हो तुम ऐ मेरे हमदम
बन के मुसाफिर मेरी राहों में आना,
ता उम्र तुम्हारा साथ निभाना ,
बस इतनी ख्वाहिस है तुमसे सनम,
ऐ खुदा कर मुझपे रहम ,
कर दे तू बस इतना करम,
की सिर्फ तुम मिलो मुझे हर जनम, 
कैसे कहूँ तुमसे दिल की दास्ताँ,
तुमसे मिला मेरे जज्बातों को रास्ता ,
और इस तरह हुआ मेरा तुमसे वास्ता,
मै और तुम हो गये हम,
मानो एक दूजे के लिए बने हो हम,
रहना पूरी ज़िदगी मेरे पास ,
देना हर वक़्त मेरा साथ ,
……….तुम्हे मेरी कसम ………..
..तुम्हे मेरी कसम …………….
……..मेरे हमसफ़र मेरे हमकदम ….

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बेबसी

कहकशें के रस्ते में अकेली भटक रही थी

बेबस और लाचार मैं बहुत तड़प रही थी

वक्त का सिलसिला चलता जा रहा था

कोई रहनुमा न नजर आ रहा था

मैं अकेली तन्हापन में

बातें करती मन ही मन में

ऐ ख़ुदा एक मौका दे दे

कोई फ़रिश्ता तोहफ़ा दे दे

किसको बताऊँ अपने ग़म का सबब मैं

सहती रही हर ज़ुल्म-ओ-सितम मैं

तलब थी उसके रूह में बस जाने की

बेबाक़ उसके ज़िस्म को छू जाने की

न मिटी प्यास न मिटा तलब

न मिली मोहब्बत न मिला ज़िस्म

अनजान परेशान मैं भटक रही थी

क़भी सहम रही थी क़भी तड़प रही थी

न जहन्नुम में जगह थी न ज़न्नत मिल रही थी

किसी मझधार में मेरी कश्ती डूब रही

ऐ ख़ुदा इक रहम बख़्स दे

इस डूबती कश्ती को कोई किनारा दे दे

मुझ बेबस को कोई सहारा दे दे।।

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A precious relationship FRIENDSHIP…

All have to care their Friendship,
Because it is a precious relationship.
It is easy to make friends,
But to maintain it, is hard trends.
Nothing is fair than Friendship,
Because it is a precious relationship.

The person who have no friends,
His precious life, he never can spend.
Everything is tasteless without Friendship,
Because it is a precious relationship.

Nobody can replace the friend,
Because neither parents nor the world are trained.
At last give importance to Friendship, ko
Because it is a precious relationship…….

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Earthquake; A huge disaster

Earthquake; a huge attack,
Due to which buildings may crack.
Earthquake; a natural disaster,
Which leads destruction very faster.
25th April, 2015,
Created a very panic seen.
In India, our native Bihar,
Greatly felt this nature’s war.
Nepal was under huge destruction,
1005 people left the world and their nation.
57 people in India found to be dead,
Many more were on hospital’s bed,
We all were afraid from that Saturday,
We’d only solution to prey.
Oh’God please don’t do this,
We’ll never disturb you, I promise.
I wish it’ll never come again,
Because it gives us only pain.
2015; a horrible year,
Everywhere only fear and fear.
17 attacks of only 2 minutes,
Instantly signal of life get cuts.
All the network fail,
No massage, no mail.
Every persons were worried,
And seems to be in hurry.
Why this natural calamity,
I know, all due to human’s activity.
The year 2015, I couldn’t forget really,
Because after 81 years this attack came catastrophically…