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कविता

छोटी सी ज़िंदगी में, सारे जहान से प्यार करूँ

कभी ज़िन्दगी का ख्याल तो कभी शौक का सवाल है,
मन एकदम विचलित और दिमाग का भी बुरा हाल है,
क्षण भर भी मुश्किल से कटे, जेहन में चल रही, बस एक ही सवाल है,
है मुझे जुनून, फिर वक़्त को क्यू मलाल है।

हर वासना छोर, हर कौशल को पाऊँ मैं,
ज्ञान अर्जित करने को हर हद पार कर जाऊँ मैं,
चंचल मन और अतृप्त हृदय को बस यही समझाऊँ मैं
क्षणिक ख़ुशी की खातिर क्या ज़िंदगी गवाऊँ मैं।

गुजर गया जो वक़्त, उसे कैसे मैं उधर लूँ ,
यही मौका है अब वर्तमान को सुधार लूँ ,
बची हुई जो ज़िंदगी है, उसे अब सवाँर लूँ।

अपने कौशल से मैं समाज का उद्धार करूँ,
समाज को प्रदान कर, खुद पर एक उपकार करूँ,
इस छोटी सी ज़िंदगी में मैं सारी जहान से प्यार करूँ।

18 replies on “छोटी सी ज़िंदगी में, सारे जहान से प्यार करूँ”

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